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पिंकू की परी 2




तरबूज के बीज और बनारसी थप्पड़

पिंकू को थोड़ी ठंडक का एहसास हुआ। और कानों में अजीब सी आवाजह सुनाई देने लगी।


'सर्रर्र... भूंऊऊऊ...' की अजीब सी आवाजें पिंकू पांडे के कानों में लगातार गूँज रही थीं। पीठ के नीचे की हड्डी में थोड़ी ठंडक का अहसास हुआ, तो पिंकू ने झटके से अपनी आँखें खोल दीं।


कमरे की वो जानी-पहचानी फटी हुई चटाई और सीलन भरी दीवारें गायब थीं। पिंकू इस समय स्टील की एक चमचमाती हुई ठंडी टेबल पर लेटे हुए थे। चारों तरफ अजीबोगरीब मशीनें लगी थीं, जिनमें नीली, हरी और लाल बत्तियां भुक-भुक जल रही थीं। छत पर लोहे के बड़े-बड़े पाइप थे, जिनसे हल्का सा धुआँ निकल रहा था।





पिंकू ने घबराकर अपने कुर्ते को देखा, गमछा अभी भी उनके कंधे पर सुरक्षित था। उन्होंने अपना सिर खुजलाया और उठकर बैठ गए।

पिंकू पांडे:"अरे दादा! ई कौन सा स्टेशन आ गया बे? बनारस से सीधे बोरीवली आ गए का हम? लेकिन बोरीवली मा ई लोहे का डब्बा कहाँ से आया? और ई एसी (AC) इतना तेज़ काहे चल रहा है, साला फेफड़ा जम जाएगा हमारा!"





पिंकू अभी टेबल से नीचे पैर लटका ही रहे थे कि उनके ठीक सामने लगे लोहे के दरवाजे में एक ज़ोरदार 'सूं...' की आवाज हुई और दरवाजा ऊपर की तरफ खुल गया।





दरवाजे के भीतर से तीन जीव रेंगते हुए अंदर आए। उन्हें देखकर पिंकू पांडे के मुँह का थूक गले के अंदर ही सूख गया। वो इंसान नहीं थे! लगभग चार फीट लंबे, चमकीली हरी त्वचा, शरीर पर केंचुए जैसी धारियां और सिर का आकार बिल्कुल किसी बड़े तरबूज जैसा था, जिस पर बड़ी-बड़ी काली आँखें चमक रही थीं। 




उनके हाथों में अजीब सी कांच की नलियां और चमचमाते हुए औजार थे।

तीनों एलियंस पिंकू को देखकर अपनी अजीब, रोबोटिक और भारी आवाज में आपस में कुछ बड़बड़ाने लगे—"ज़ीरो-ज़ीरो वन... ह्यूमन नंबर 407... ज़ी-टो-मा-की-लो!"





पिंकू ने अपनी आँखों को दो बार मला, उन्हें लगा कि शायद रात की तोरई की सब्जी ने दिमाग में कोई नया केमिकल लोचा कर दिया है। लेकिन जब सबसे आगे वाले एलियन ने एक लंबी सुई पिंकू की तरफ बढ़ाई, तो पिंकू पांडे का शुद्ध बनारसी खून खौल उठा। वे झटके से टेबल से नीचे कूदे, अपना गमछा कमर पर कसकर बांधा और सीधे मुख्य एलियन के मुँह के पास उंगली ले जाकर दहाड़े





पिंकू पांडे:"अरे ओए! साले तरबूज के बीज! हमको काहे उठा लिए बे? हम यहाँ इंडिया में हाई स्कूल फेल होकर वैसे ही परेशान हैं, ऊपर से तुम हरी चटनी जैसे चेहरे लेकर आ गए! ई सुई हमको चुभाओगे? एक घूंसा मारेंगे ना... तो छितरा के बिखर जइहौ! बप्पा भी ना बटोर पइहें तुमका!"





एलियंस को शायद ब्रह्मांड के किसी कोने में ऐसा 'कड़क' स्वागत मिलने की उम्मीद नहीं थी। पिंकू की कड़क आवाज और बनारसी स्वैग देखकर तीनों एलियंस दो कदम पीछे हट गए। उनकी तरबूज जैसी खोपड़ी पर लगी छोटी-छोटी एंटीना तेज़ी से हिलने लगीं, जैसे उनका सॉफ्टवेयर क्रैश हो गया हो।





बीच वाले एलियन ने हिम्मत जुटाकर अपनी लेज़र गन पिंकू की तरफ तानी। लेकिन पिंकू पांडे तो बनारस की गलियों में लाठियां खाकर बड़े हुए थे, वे इन सब कांच के खिलौनों से कहाँ डरने वाले थे।





पिंकू पांडे:"का बे? खिलौना दिखा के डराओगे लल्लन पांडे के पोते को? साली खोपड़िया एकदम कन्फुसिया गई है रे बाबा हमारी! रुको, तुमको अभी बनारसी बनारस का स्वाद चखाते हैं!"





पिंकू ने आव देखा न ताव, अपनी चप्पल निकालने के लिए नीचे झुके। लेकिन तभी पूरी स्पेसशिप में एक बहुत ज़ोरदार धमाका हुआ—'धड़ाम!'

स्पेसशिप की सारी नीली और हरी लाइटें अचानक बंद हो गईं और पूरे कमरे में लाल रंग की बत्तियां तेज़ी से चमकने लगीं। एक बहुत तेज़ साइरन बजने लगा—'पॉं-पॉं-पॉं!'





तीनों एलियंस जो अभी तक पिंकू पर रिसर्च करने की सोच रहे थे, वे अपनी गन्स और सुई छोड़कर डर के मारे चिल्लाते हुए दरवाजे की तरफ भागे और देखते ही देखते बाहर निकलकर दरवाजा बंद कर लिया। पूरा कमरा हिलने लगा, जैसे यान किसी बड़ी मुसीबत में फंस गया हो।





पिंकू पांडे अकेले उस लाल रोशनी वाले अजीब लोहे के कमरे में खड़े थे। उन्हें समझ आ गया था कि यह गाड़ी (स्पेसशिप) अब पंचर होने वाली है।

पिंकू पांडे:"अरे दादा! ई तो डब्बा डोलने लगा बे! ई हरी चटनी वाले तो हमको यहीं छोड़ के भाग गए। अब ई लोहे के भूत बंगले से बाहर कैसे निकलें?"




पिंकू ने हिम्मत की और बंद दरवाजे को लात मारी, लेकिन वह हिला तक नहीं। तभी उनके सिर के ऊपर लगा एक छोटा सा वेंटिलेशन पाइप टूटकर नीचे गिर गया, जिसके अंदर जाने का एक छोटा सा रास्ता दिख रहा था।




पिंकू ने भगवान बजरंग बली का नाम लिया, गमछे को मुँह पर बांधा और उस पाइप के रास्ते रेंगते हुए आगे बढ़ने लगे। वे नहीं जानते थे कि यह रास्ता उन्हें सीधे स्पेसशिप के उस मुख्य कंट्रोल रूम में ले जाएगा, जहाँ ब्रह्मांड का सबसे बड़ा विलेन उनका इंतजार कर रहा है!





(भाग 2 समाप्त - आगे क्या होगा? क्या पिंकू पांडे इस उड़ते हुए डिब्बे को चला पाएंगे

? और कौन है वह विलेन जो परी की बहन को चुराने वाला है? जानने के लिए पढ़ें भाग 3!


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